अपोलो ने किया सफल ऑपरेशन, ट्रीसमस कि समस्या से दिलाया निजात…..

अपोलो ने किया सफल ऑपरेशन, ट्रीसमस कि समस्या से दिलाया निजात…..

बिलासपुर – पान गुटखा का उपयोग करने कि वजह से एक समय मुंह ना खुलने की समस्या लोगों में पाई जाती थी। लेकिन अब यह समस्या प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में पाई जाने लगी है। आवश्यकतानुसार मुंह नहीं खुलने की समस्या को ट्रीसमस कहा जाता है।

एक स्वस्थ व सामान्य व्यक्ति का मुंह 30 एमएम लगभग तीन उंगली खुलना चाहिए। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन कि रिपोर्ट अनुसार देश व प्रदेश पर वर्तमान समय देखा जाए तो पान गुटके का सेवन गलत तरीके से किए जाने के कारण मुंह पूरी तरह ना खुलने की समस्या से काफी लोग जूझ रहे हैं। अपोलो के वरिष्ठ दंत एवं फेशियल सर्जन डॉक्टर विनय खरसन ने बताया कि पान गुटखा खाने से नहीं बल्कि उन्हें गलत तरीके से मुंह अंदर निकोजा पर दबाने से इंफेक्शन हो जाता है और कई तरह की समस्या से लोगों को सामना करना पड़ता है। डॉक्टर खरसन ने बताया कि मुंह के अंदर की त्वचा या परत जिसे हम निकोजा कहते हैं वह अत्यधिक संवेदनशील होता है। वह मनुष्य के जागते समय विभिन्न क्रियाकलापों जैसे बात करना, खाद्य पदार्थ चबाने से इनकी सफाई की प्रक्रिया निरंतर जारी रहती है पर सोते समय यह प्रक्रिया रुक जाती है। कुछ लोगों कि आदतों में यह देखा गया है कि सोते समय भी वह मुंह पर गुटका दबा कर सो जाते हैं जिसके कारण निकोजा को हानि पहुंचाता है और आगे चल के यह ट्रिसमस का रूप ले लेता है। जिससे कि मुंह का खुलना कम हो जाता है

आज कल लोगों में मुंह के कम खुलने की समस्या को देखते हुए अपोलो ने हफ्ते में एक दिन का समय चेकअप के लिए रखा है जिसका नाम ट्रिसमस दिया गया है। सोमवार को अपोलो के सीओओ डॉक्टर सजल सेन, वरिष्ठ दंत चिकित्सक एवं फेशियल सर्जन डॉ विनयखरसल ने प्रेस वार्ता कर बताया कि चेकअप के दिन पथरिया क्षेत्र के ग्राम सोढी निवासी मन्नूलाल कोसले अपोलो आया उसका मुंह पूरी तरह नहीं खुल रहा था जिससे वह परेशान था । उसने अपने मुंह न खुलने का कारण बताया। मन्नूलाल कोसले ने बताया कि 11 साल पहले उसका एक्सीडेंट हुआ था। एक्सीडेंट होने के कारण उसके मुंह के जबड़े का जॉइंट फ्रैक्चर हो गया था। जिसका इलाज उसने रायपुर के हॉस्पिटल में कराया था। इलाज के दौरान डॉक्टर ने उसके जबड़े को तार से 2 महीने के लिए बांध दिया था। 2 महीने के बाद बांधे गए तार को निकाला गया। कुछ दिनों तक वह ठीक-ठाक रहा ।उसके बाद मुंह का खुलना धीरे-धीरे कम होता गया। एक समय ऐसा भी आया जब मन्नूलाल कोसले का मुंह खुलना इस कदर बंद हो गया कि वह भोजन करने में असमर्थ हो गया। वह पिछले 2 साल से पेय पदार्थ पीकर ही जीवन यापन करने लगा। उसने अपनी समस्या अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों के समक्ष रखी जिसका सफल ऑपरेशन कर उसे नया जीवनदान दिया गया है। अब वह पहले कि तरह स्वस्थ है और सभी प्रकार के भोजन खाने में सामर्थ है।

vandana