बिलासपुर लोकसभा में शिक्षित उम्मीदवारों की दखल ।

बिलासपुर लोकसभा में शिक्षित उम्मीदवारों की दखल ।
अप्रैल मई माह में लोकसभा चुनाव होनेवाले है एक ओर जहां कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में सुनामी जीत दर्ज करते हुए भाजपा को बुरी तरह पटखनी दी है इससे एक बात तो साफ हो गई है कि अब भाजपा में पुराने चेहरों की मांग खत्म हो गई है या कहे तो अहंकारी नेताओं एवं कम पढ़े लिखे नेताओ को भाजपा में अब जनता देखना नहीं चाहती है और सिर्फ पैसों के दम पर चुनाव जीतना भी कोई गारंटी नहीं रह गया है । यह जनता ने विधानसभा चुनाव में भाजपा के 9 दिग्गज मंत्रियों को हराकर ये संदेश दे दिया है कि हम इन नेताओ को नहीं देखना चाहते हैं लेकिन फिर से लोकसभा चुनाव आते ही सत्ता की लालच ने इन हारे हुए नेताओ अपनी दावेदारी करने ने शर्म भी नहीं आ रही है । भाजपा संगठन के राष्ट्रीय नेताओ की क्या मजबूरी है जो जनता द्वारा नकारे गए नेताओ को क्लस्टर प्रभारी की जिम्मेदारी देकर भाजपा ने जनता का अपमान किया है ।
बिलासपुर लोकसभा चुनाव बना सबसे दिलचस्प ।
बिलासपुर भाजपा में विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्व मंत्री के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक ही नेता का नाम प्रमुखता से प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर चर्चा का विषय रहा । वह नाम है डॉ मनीष राय, अखिल भारतीय सदस्य माधव नेत्रालय , नागपुर एवं संयोजक , माई होम बिलासपुर जो भाजपा के आजीवन सदस्य भी हैं । आज जनता पुनः बिलासपुर लोकसभा में एक शिक्षित प्रत्याशी के रूप में डॉ मनीष राय जी को अपना सही प्रतिनिधि मान रही है क्योंकि अब तक जितने भी बिलासपुर से प्रत्याशी जीतकर संसद या विधानसभा पहुंचे है सभी ने सिर्फ अपना विकास तो किया लेकिन बिलासपुर को भूल गए, क्योंकि वे सभी बाहरी थे । मगर पहली बार बिलासपुर का दर्द समझनेवाला स्थानीय प्रत्याशी जो बहुत ही ज्यादा शिक्षित व संघ का संस्कार लेकर बड़ा हुआ है डॉ मनीष राय ने बिलासपुर में एक नई छाप सामाजिक काम करके पैदा की है जिससे वो सिर्फ युवा वर्ग ही नहीं अपितु महिलाओं और वरिष्ठ लोगो के बीच भी बहुत चर्चित और पसंदीदा व्यक्तित्व बन चुके हैं । दूसरे प्रत्याशी के रूप में भाजपा से संघ का दूसरा बड़ा चेहरा डॉ विनोद तिवारी के रूप में भी बिलासपुर लोकसभा से दावेदारी पेश कर रहे हैं जो खुद एक शिक्षित व्यक्तित्व है और संजीवनी अस्पताल के संचालक भी है जो हड्डी रोग विशेषज्ञ है । जो ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं ।
डॉ मनीष राय एक सामाजिक समरसता की मिसाल है ।
आज जहां राजनीति सिर्फ जातिवाद और समाज में बांटकर की जा रही है वहीं डॉ मनीष राय को सभी वर्ग और धर्मो के लोग अपना मानते हैं और श्री राय भी सभी समाज के कार्यक्रमों में शामिल होकर उनके साथ उनके जैसे ही हो जाते है । अगर वर्तमान सांसद जिनका टिकट लगभग कटना तय माना जा रहा है तो साहू समाज, बंगाली समाज, यादव समाज एवं सभी प्रमुख समाज के लोग सिर्फ डॉ मनीष राय के नाम पर ही सहमति जताने की मंशा रखते हैं । क्योंकि विधानसभा चुनाव में भी लोगो ने कहा था कि बिलासपुर से सिर्फ अगर कोई चुनाव जीत सकता है तो वो सिर्फ डॉ मनीष राय ही जीत सकते है लेकिन पार्टी ने जनता की भावना का ध्यान नहीं रखा और परिणाम सबके सामने है । अगर फिर से वही गलती भाजपा अपने सारे 11 लोकसभा में दोहराती है तो निश्चित रूप से विधानसभा जैसा दुष्परिणाम फिर से भोगना पड़ेगा और इसका भुगतान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा व्यक्तित्व खोकर देश को भुगतना पड़ सकता है ।
इसीलिए शायद पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह भी राजनांदगांव सीट छोड़कर बिलासपुर या जांजगीर सीट पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं और अपने लिए संभावनाएं तलाश रहे है क्योंकि उनको लगता है भाजपा अगर कहीं मजबूत है तो वो सिर्फ बिलासपुर और जांजगीर जिले में है ।
अब देखना होगा कि भविष्य में भाजपा गलतियों से सीख लेती हैं या फिर से वही गलती दोहराती है । मगर पूरे देश और प्रदेश की नजर बिलासपुर लोकसभा सीट पर रहेगी और जनता अपने लिए सही और काबिल सांसद का चुनाव करने के लिए तैयार है ।

vandana