बिल्हा:-पाकिस्तान के खिलाफ बिल्हा के सिंधी समाज ने निकले मौन जुलुस

 

बिल्हा से *मनितोष सरकार* की रिपोर्ट

बिल्हा 24 सितम्बर। पाकिस्तान और भारत के बीच अनबन के चलते पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ बिल्हा के सिंधी समाज ने सोमवार को मौन जुलूस निकाला, सोमवार सुबह 10:00 बजे बिल्हा के फाटक नीचे स्थित सिंधी भवन से एसडीएम कार्यालय तक बड़ी संख्या में सिंधी समाज के स्त्री-पुरुष मौन जुलूस कर अनुविभागीय दंडाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पाकिस्तान में हिंदुओं के मंदिर तोड़े जाने, धर्म परिवर्तन करवाने एवं बालिकाओं पर हो रहे अत्याचार का जिक्र किया गया। इसका प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी के अलावा राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली में भेजा गया।

जानकारी के मुताबिक पिछले 15 सितंबर को पाकिस्तान के घोटकि शहर में सिंधी समाज के धर्म स्थलों एवं श्रद्धालुओं से मारपीट की गई एवं उनके व्यावसायिक संस्थानों को लूटा गया था। 16 सितंबर को एक हिंदू छात्रा नमृता चंदानी ने पाकिस्तानी प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी, उक्त छात्रा बीबी आसिफा डेंटल कॉलेज के मेधावी छात्रा थी। दरअसल बताया जा रहा है कि नमृता को आत्महत्या नहीं बल्कि उसकी हत्या हुई है। इस पर वहां के स्थानीय अदालत ने न्यायिक जांच से साफ इंकार कर दिया है, उनका मानना है कि यह आत्महत्या का मामला है।

गौरतलब है कि 1947 के आजादी के बाद सिंध प्रांत पाकिस्तान के कब्जे में आ गया था अतः वहां से अनेकों सिंधी समुदाय के लोग भारत में शरण लिए हुए हैं। जिसमें पाकिस्तान में सिंधी समाज को अल्पसंख्यक अधिकारों की पुष्टि की गई थी। जिस पर 8 अप्रैल 1950 को ‘दिल्ली संधि’ के तहत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान और भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बीच समझौता पर हस्ताक्षर हुए थे जो वर्तमान में पाकिस्तान द्वारा उल्लंघन किया जा रहा है।

सोमवार को हुए इस मौन जुलूस में बिल्हा सिंधी समाज के संरक्षक गोपाल दास बजाज सहित भीखचंद बजाज, रेलूमल हिंदुजा, नानक रेलवानी, अध्यक्ष राजपाल रामानी, दिलीप गेहानी, दिलीप जसूजा, कमलेश माखीजा, प्रताप राम रेलवानी, नंदलाल माधवानी, अमित नाबानी, प्रकाश हिंदुजा, महिला अध्यक्ष तारा रामानी, राजकुमारी माधवानी, लाजवंती चागलानी, ममता रामानी, सुषमा निगवानी, सीमा रामानी, सोनम नाबानी, वर्षा एवं सीमा सहित समाज के सभी पुरुष – महिलाएं शामिल थे।

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