श्रमिक पलायन मे सांस्कृतिक समस्याएं पैदा होती है राजीव गांधी…?

श्रमिक पलायन मे सांस्कृतिक समस्याएं पैदा होती है राजीव गांधी
देश के अशांत क्षेत्रों में रोज जा रहे हैं बिलासपुर के श्रमिक
बिलासपुर:- बिलासपुर का रेलवे स्टेशन श्रमिक पलायन के लिए अंतरजिला सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है बिलासपुर में 6 ब्लॉक हैं जिसमें से बिल्हा, मस्तूरी और कोटा क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मानव श्रम का पलायन लगातार हो रहा है एक समय था जब भारत के युवा प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी ने श्रम पलायन को संस्कृति की परेशानियों ​से जोड़ते हुए उसे रोकने के लिए मानव संसाधन मंत्रालय की आधारशिला रखी थी कम लोगों को यह पता होगा कि इस तरह के विभाग के खुलने की घोषणा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के एक गांव में ही हुई थी तब उनके साथ उस समय के मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा जी उपस्थित थे आज राज्य में ऐसी सरकार है जिसके मुख्यमंत्री यह दावा करते हैं कि वह राजीव गांधी के आदर्शों को पूरा करने की चाह रखते हैं किंतु वास्तविकता के धरातल पर ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा रोज किसी ना किसी जिले के श्रमिक बिलासपुर स्टेशन में बस अथवा अन्य किसी सार्वजनिक यातायात के माध्यम से लेबर सरदार द्वारा लाए जाते हैं और देश के उन राज्यों में भेजे जा रहे हैं जो अभी अशांत है। किसी भी ग्राम पंचायत में श्रमिक पलायन का कोई भी रिकार्ड संधारित नहीं किया जाता कहने को समय-समय पर कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को ऐसे रिकार्ड संधारित करने का निर्देश दे रखा है जिन पर प्रत्येक साल स्मरण पत्र भी जारी कर दिया जाता है किंतु किसी भी ग्राम पंचायत में ऐसे पत्रों का कोई प्रभाव नहीं होता और सरपंच जिन पर रजिस्टर को बनाने का जिम्मेदारी है वे स्वयं लेबर सरदार बंद कर श्रमिकों को भेजने की व्यवस्था में लग जाते हैं लेबर सरदार की जातिवाद की सामाजिक बुराई से भरपूर सहारा मिलता है। यह जातिवाद आरपीएफ, जीआरपी और श्रम विभाग में खूब खेला जाता है। आज बलौदा बाजार जिले के श्रमिक दो बसों में आए और अमृतसर की ट्रेन में बैठकर पठानकोट के रास्ते जम्मू कश्मीर गए यह बात संभव ही नहीं की दूसरे जिले से दो बस में लोग आए और बिना सरकारी एजेंसी के संरक्षण के बड़े आराम से ट्रेन में बैठ कर चले गए बलौदा बाजार से बिलासपुर आने के लिए ना जाने कितने थाने क्षेत्रों की सीमा में प्रवेश करने तथा निकालने की जरूरत होगी। यह बात तब विशेष मायने रखती है जब राज्य में चुनावी आचार संहिता लगी हुई है और विभिन्न चेकपोस्ट पर जांच का दावा किया जाता है।
vandana