कोरोना की रेस को प्रशासन ने समझा था फर्राटा मैराथन उखड़ गई सास …?

कोरोना की रेस को प्रशासन ने समझा था फर्राटा मैराथन उखड़ गई सास

 

बिलासपुर :—मार्च के महीने में जब केंद्र और राज्य सरकार से कोविड-19 पर पहले दिशानिर्देश आए तो प्रशासन के आला अधिकारियों ने बड़े उत्साह के साथ संसाधनों को लगाना प्रारंभ किया वे इस बीमारी को साइक्लोन समझ रहे थे जो तेजी से आएगा और निकल भी जाएगा पर यह सच था ही नहीं यही कारण है कि अब मैराथन रेस में पूरी व्यवस्था ठप मानकर खड़ी हो गई है प्रशासनिक दफ्तरों के गेट पर ताले नजर आते हैं कार्यालय औपचारिक रुप से खुलने के बाद भी  उपस्थिति 50 प्रतिशत है कौन कहां जा रहा है क्या कर रहा है पर सच्चा जवाब नहीं मिलता शिक्षा विभाग ने जब छुट्टी थी तब शिक्षकों से दाल, चावल, आटे तक बटवालिया कभी अचानक सर्वे में लगवा दिया गया फिर सर्वे करते करते कब समाप्त हो गया पता ही नहीं चला गांव की तो छोड़िए शहर की मोस्ट वीआईपी कॉलोनी में भी कई घर ऐसे है  जिनमें शासन की किसी दफ्तर का कोई व्यक्ति सर्वे करने नहीं पहुंचा भोपाल, जबलपुर , इंदौर से सड़क मार्ग से  वापस आए दर्जनों लोग तालापारा, मगरपारा, चाटीडीह, मसान गंज आदि क्षेत्र में घूम रहे हैं पर प्रशासन को नहीं पता या जान कर भी अंजान हैं धारा 144 का प्रभाव केवल कलेक्ट्रेट, एसडीएम कार्यालय में दिखाई देता है  अन्यथा किसी भी बाजार में चले जाइए आम से लेकर खास तक गिन गिन कर नियमों को तोड़ता नजर आता है शहर में घुसने वाली चार चक्का गाड़ी में सात-सात, आठ-आठ लोग  नजर आते हैं राज्य के डीजीपी ने ट्रैफिक पुलिस को चालान काटने से रोका है वसूली से नहीं मुखिया जनता को राहत देना चाहते थे  हुआ उलट राहत नहीं मिली खजाने में जाने वाली रकम भी बंद हो गई हर साल अप्रैल-मई में नलकूप खनन पर रोक लग जाती थी पर इस बार भूमिगत जल की चिंता किसी को नहीं हो रही है क्या ऐसा माना जाए कि इस साल भूमिगत जल का स्तर नीचे नहीं जा रहा या पिछले कई वर्षों के प्रतिबंध झूठे थे गोल बाजार से लेकर गांधी पुतला तक प्रत्येक दुकान अपने तरीके से नियम की धज्जियां उड़ा रही है शहर की आधी दुकानों के पास आज भी गोमास्ता नहीं है  कुछ जीएसटी रजिस्ट्रेशन को इसका पर्याय बताते हैं जबकि दोनों अलग-अलग महत्व रखते हैं प्रशासन की रीति नीति कार्यपद्धती लक्ष्य क्या है यह पारदर्शिता के साथ कोई नहीं बताता जिला में लाखों करोड़ों के खर्च के बाद कहां कितने मरीज हैं कितने आइसोलेट हैं कितने  क्वॉरेंटाइन गया है रोज निकलने वाले अपशिष्ट का विमिष्टीकरण कैसे हो रहा है जैसे सवालों पर कोई जवाब नहीं देता जिस अधिकारी से पूछो वह स्वयं को कोविड-19 से लड़ने वाला योद्धा बताता है पर लड़ाई कर कैसे रहा है कतरा जाता है अस्पतालों में अब पूर्व के सामान भर्राशाही ही शुरू हो गई है  कोविड-19 की आड़ में खातों में खूब घपले हो रहे हैं रेड क्रॉस से लेकर जिला अस्पताल, सिम्स, सीएचएमओ दफ्तर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक बंदरबांट चल रहा है अभी तो यह स्थिति है कि जो लोग 6-6 माह से बिना किसी को सूचना दिए दफ्तर से गायब थे उन्होंने आनन-फानन में अपनी बहाली करा ली और किसी को पता नहीं चला यह खेल शिक्षा, जंगल से होते हुए पीडब्ल्यूडी ग्रामीण सड़क तक खूब चल रहा है

vandana