जिले का राजस्व अमला नहीं करता सर्वोच्च अदालत की परवाह

जिले का राजस्व अमला नहीं करता सर्वोच्च अदालत की परवाह

तालाब को संरक्षित करना नहीं है हमारी आदत

बिलासपुर :- बिलासपुर जिले में न तो  देश की सर्वोच्च अदालत के आदेश का मान रखा जाता है ना ही भू राजस्व संहिता के कंडिकाओं का कोई मान है  देश का सबसे बड़ा न्यायालय एक नहीं कई बार तालाबों के संरक्षण की बात कह चुका है  किंतु शहर के इतिहास में तालाबों को पाटकर बेच देना ही परंपरा है और यह सतत जारी है भू राजस्व संहिता पर यह निर्देश देती है कि राजस्व अमले के अधिकारी सरकारी जमीनों को संरक्षण करेंगे  साथ ही भूमि चिन्ह का रखरखाव भी करेंगे भूमि संरक्षण में केवल भूमि नहीं उसके रिकॉर्ड को दुरुस्त रखना भी शामिल है किंतु यहां ऐसा करने के स्थान पर इसका उलट किया जाता है ताजा उदाहरण पटवारी हल्का नंबर 22 तोरवा खसरा क्रमांक 1320/1 रकबा 0.817 तथा 1319 – 1321 चारागाह की मद में दर्द है  इसके बावजूद अतिरिक्त कलेक्टर ने इस जमीन का मद परिवर्तन कर दिया  तालाब कन्हाई दानी के निजी नाम पर दर्ज था जो नरेश कुमार लिखमलिया के नाम पर आ गया भू राजस्व संहिता की धारा 1959 / 237 (2) यह कहती है कि निजी तालाब शासनाधीन हो  जाता है किंतु बिलासपुर में ऐसा नहीं होता  उलट यहां पर तालाब न केवल नाम परिवर्तन होता है  साथ ही इसके मद में भी परिवर्तन हो जाता है ऊपर वर्णित जमीन में ऐसा ही हुआ वह तो भला हो कमिश्नर कोर्ट का जिसने इस आदेश पर रोक लगा दी अन्यथा 1984 में बिलासपुर कलेक्टर आदेश देते रह गए कि जूना बिलासपुर खसरा क्रमांक 733, 734 पटवारी हल्का नंबर 22, 34 में  मंगू डबरी के नाम से  विख्यात 2 एकड़ तालाब नजूल का है और जिस आदेश के तहत उसे नामांतरण किया गया है उसके खिलाफ शासन  स्वयं अपील करें किंतु कलेक्टर के इस आदेश को ना केवल गुमा दिया गया बल्कि 2003 में तमाम तथ्यों को समझते बुझते पीके वर्मा तत्कालिक अतिरिक्त कलेक्टर ने इसका भूमि मद परिवर्तन कर इसे वाणिज्यिक में तब्दील कर दिया  और आज इस तालाब में नामचीन माल खड़ा है जिसमें पार्किंग की जमीन पर भी अतिरिक्त निर्माण कर बेचा गया है इसी तरह इन दिनों अशोक नगर में विद्युत मंडल कार्यालय के सामने एक तालाब को पाटने का खेल चल रहा है और तहसील ऑफिस में किसी तालाब का फौती नामांतरण भी चल रहा है कोई आश्चर्य नहीं कि तालाब के पटते पटते नामांतरण भी हो जाए वर्तमान में जिले में जो मास्टर प्लान लागू है उसे पूर्व के मास्टर प्लान से तुलना की जाए तो वर्तमान मास्टर प्लान में 15 तालाब कम हो चुके हैं इसका सीधा सा अर्थ है कि भूमिगत जल संरक्षण, पानी बचाओ, हमारे तालाब हमारी धरोहर, सरोवर धरोहर जैसी योजनाएं किताबी है और वास्तविकता हर जमीन को वर्ग फीट में बेचना है… 
vandana