जेल से अंडरट्रायल कैदी का फोटो हुआ वायरल पीड़ित पत्रकार ने रिहाई के बाद लगाया आरटीआई

जेल से अंडरट्रायल कैदी का फोटो हुआ वायरल
पीड़ित पत्रकार ने रिहाई के बाद लगाया आरटीआई
बिलासपुर :- जेल बिल्डिंग की सूचनाओं पर भरोसा करें तो अंदर तो अंदर बाहर भी फोटो नहीं ली जा सकती किंतु 23 जून को पचपेढी  थाने ने एक पत्रकार को हिरासत में लिया और वही से खेल प्रारंभ हो गया अदालत में उसे जानबूझकर संध्या 6:00 बजे प्रस्तुत किया गया कोशिश भरसक यही थी कि जज अभियुक्त को जेल भेज दें बिना मामला सुने पर ऐसा हो नहीं पाया अभियुक्त को अदालत से जमानत प्राप्त हो गई जमानत पर्ची ना होने के कारण पचपेड़ी थाने ने अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जेल के अंदर   मोबाइल ले जाना वर्जित है उसके बावजूद जो सिपाही अभियुक्त को जेल के अंदर लेकर गए उन्होंने न केवल फोटो खींचा है उसे वायरल भी किया है इस संदर्भ में पीड़ित पत्रकार ने रिहाई के बाद सूचना का अधिकार के तहत जेल से वीडियो फुटेज की मांग भी की है जिसे यह ज्ञात हो कि किस सिपाही ने फोटो खींचा इस संदर्भ में हमने जेलर से बात की उन्होंने फोटो देखकर माना की फोटो जेल के अंदर का है और कहा कि प्रशासनिक कार्यवाही होगी वही पुलिस अधीक्षक ग्रामीण ने कहा कि जेल के अंदर मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित है तो फोटो कैसे खींच गई स्पष्ट समझ आता है कि वह सिपाही की करतूत को ढाक रहे हैं असल में जेल के अंदर सुविधाओं की ठेकेदारी इन दिनों एक पोर्टल पत्रकार करने का दावा करता है और इस खेल में जेल का स्टाफ और पुलिस दोनों शामिल है पोर्टल वाला का खेल ही यह है कि जो जेल के अंदर जाए और पैसा ना दे उसका जेल के अंदर का ही फोटो ना केवल उतरता है बल्कि उसके परिवार के सदस्यों को पहुंचाया भी जाता है और वही सुविधाओं के बदले धन देता है जो कि आपस में बटता है 23 तारीख की पत्रकार की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत ने  जेल के इस गंदे धंधे को फिर से उजागर
कर दिया पचपेड़ी थाना तो ऐसे कामों के लिए माहिर है ऐसा कहा जाता है कि जिस किसी से मांगा हुआ सेवा  शुल्क नहीं मिलता उसकी गिरफ्तारी से लेकर जेल के अंदर पहुंचाने तक की पूरी फोटोग्राफी करके उसे वायरल करने की धमकी तक दी जाती है थाने के अंदर, जेल के बाहर , कोर्ट के अंदर  यही व्यवस्था किसी पत्रकार को फोटो लेने से मना करती है और नियमों का हवाला दिया जाता है किंतु सिपाही फोटो लेकर वायरल करते हैं तब इसके विरुद्ध ना तो फोटोग्राफी एक्ट के तहत कोई मामला बनता है न हीं जेल मैनुअल के तहत.. जेल दाखिल का फोटो उपलब्ध होने के बावजूद नियमों से बंधा होने के कारण प्रकाशित नहीं किया जा रहा…..
vandana